रक्षा बंधन -शहीद सुखराम बिश्नोई की प्रतिमा को राखी बांधी तो बहन के छलक पड़े अश्रु

सांचौर

उपखंड क्षेत्र के दाता गांव में बहन का रक्षाबंधन के पर्व पर भाई और बहन के मध्य अटूट प्रेम का रिश्ता देखने को मिला। शहीद सुखराम बिश्नोई 30 मई 1996 में हुए थे शहीद उसके बाद से ही बहन का भाई इस दुनिया में तो नहीं था लेकिन वह कभी भी अपने भाई को अपने से अलग नहीं मानते हुए उसने शहीद होने के बाद से ही लगातार रक्षाबंधन के पर्व पर शहीद सुखराम बिश्नोई स्मारक स्थल पर पहुंचकर राखी बांधी।बहन की आंखों से आंसू बह निकले और साथ खडें परिवार जन आंखें भी नम हो गयी। अपने भाई के साथ बिताए वक्त को लेकर बहन भावुक हो गई।  वहीं सुमिता एवं रोशनी अपने अंकल के प्रतिमा की हाथ की कलाई पर भाई को रक्षा सूत्र बांधकर भाई और बहन के अटूट प्रेम के बंधन को लगातार निभा रही है। शहीद की बड़ी बहन हर साल शहीद भाई को रक्षाबंधन और भाई दूज पर प्रतिमा पर रक्षासूत्र बांधती हैं। 30 मई 1996 में हुए थे शहीद दाता निवासी सुखराम विश्नोई 19 वर्ष की उम्र में बीएसएफ में भर्ती हो गए थे। जिसके बाद 1996 के लोकसभा चुनाव में जम्मू कश्मीर में ड्यूटी लग गई थी।


चुनाव के दौरान 30 मई 1996 को हुए आतंकी हमले के दौरान सुखराम विश्नोई शहीद हो गए। विश्नोई ने ट्रेनिंग के दौरान गोल्ड मेडल हासिल किया था। शहीद के भाई बाबूलाल बिश्नोई ने बताया कि हमारे भाई अमर हैं, हमेशा जिंदा रहेंगे। बहन का कहना है कि उसके भाई ने देश रक्षा के लिए और करोड़ों बहनों की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है, ऐसे में उनका भाई अमर है, उनके लिए वह आज भी जिंदा हैं और हमेशा ही जिंदा रहेंगे। इस मौके पर भाखराराम सारण,लूणाराम दर्जी पत्रकार,प्रकाश लोल पत्रकार, रामजीवन जाणी, किसनाराम जाणी,बाबूलाल वरड़,पुष्पा पुष्पा,बाबू,मंगली,वादू समेत परिवार के सदस्य उपस्थित थे