जैसलमेर में सीईओ की ईमानदारी से थे परेशान,जनप्रतिनिधि व ऑफिस स्टाफ इनके तबादले से खुश

जैसलमेर:-      सीईओ टी. शुभमंगला ने 6 माह में ₹200 करोड़ का मनरेगा व अन्य कार्यों में फर्जीवाड़ा रोका


विदाई कार्यक्रम में कहा; मैं यहां अभी बहुत कुछ करना चाहती थी, कई काम सोचे थे लेकिन नहीं कर पाई,अब अधूरे कार्यों को करना यहां के अधिकारियों के विवेक पर


सालों बाद जैसलमेर को एक ईमानदार अधिकारी मिला था वह भी सिर्फ छह माह के लिए ही दो दिन पहले सरकार द्वार जारी आईएएस अधिकारियों की तबादला सूची में जैसलमेर जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी टी. शुभमंगला का भी नाम आ गया। गौरतलब है कि जनवरी में सीईओ शुभमंगला ने जैसलमेर में सीईओ का पदभार ग्रहण किया था। उनकी कार्यशैली उनके ज्वाइन करते ही सभी को समझ में आ गई थी। शुरूआती दौर में तो उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों के दौरे शुरू किए जहां भी मनरेगा व अन्य पंचायती राज योजनाओं में मौके पर श्रमिक या काम नहीं मिले, उन्हें हाथों हाथ निरस्त करने के साथ संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की। वहीं जिले के विकास अधिकारियों को भी सख्त नोटिस जारी किए।


विदाई में भावुक होकर बोली सीईओ; मैं जाना नहीं चाहती थी


पंचायती समिति जैसलमेर की ओर से आयोजित विदाई समारोह में सीईओ टी शुभमंगला ने कहा कि मुझे जब जैसलमेर पोस्टिंग मिली तो बहुत खुश हुई। मैं इस तरह के पिछड़े इलाकों में काम करना चाहती थी और मुझे मौका मिल गया। पंचायती राज व ग्रामीण विकास में बहुत चुनौतियां थी और वर्तमान में भी है, मुझे बहुत कुछ सीखने को भी मिला। उन्होंने कहा कि यह खुशी का अवसर तो नहीं है, क्योंकि मैं यहां पर बहुत कुछ करना चाहती थी। मैंने जो सोचा था, वो में नहीं कर पाई। जो काम अधूरे रह गए हैं उन्हें उसी तरह से पूरा करने के लिए मैं यहां मौजूद अधिकारियों के विवेक पर छोड़ती हूँ। उन्होंने कहा कि सरकारी काम भगवान के काम के बराबर होता है। हमारा एक कदम कई लोगों के लिए बदलाव ला सकता है। उन्होंने उपस्थित अधिकारियों व कर्मचारियों से विनती करते हुए कहा कि अपने स्वार्थों को छोड़कर जो लोग हाशिए पर उनके लिए, समाज के लिए और देश के लिए आगे आकर काम करें। उन्होंने बातों ही बातों में सब कुछ बता दिया कि यहां पंचायतीराज में कितनी गड़बड़ी है और उसे किस तरह से रोककर वास्तविक लाभार्थी तक फायदा पहुंचाया जाए।


कागज़ों में चली रही फर्जी लेबर के 100 करोड़ बचाए


टी. शुभमंगला ने ज्वाइन करने के साथ ही सभी को हिदायत दे दी थी कि वे किसी भी सूरत में गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं करेगी। उनके सख्त रवैये के चलते सभी ग्राम पंचायतों के सरपंच एकबारगी सकते में आ गए। उनकी सख्ती से सामने आया कि मनरेगा में लेवर आई सिर्फ कागजों में चल रही है। क्योंकि निरीक्षण के दौरान मौके पर श्रमिक नहीं मिलने पर हाथों हाथ मस्टररोल में जीरो दर्ज किया ग्राम पंचायतों में मनरेगा में लेबर एकाएक कम हो गई। जहां इनसे पहले प्रतिदिन 40 से 50 हजार मनरेगा श्रमिक चलते थे वहीं इनके आने के बाद रोजाना 4 से 5 हजार श्रमिक ही रह गए। इससे 100 करोड़ का फायदा हुआ।


अन्य कई कार्यों की स्थिति देख मौके पर निरस्त कर दिए


पिछले दिनों चांधन क्षेत्र में सीईओ शुभमंगला ने मौके पर काम नहीं मिलने पर हाथों हाथ 7 लाख रुपए का काम निरस्त कर दिया। ऐसे कई उदाहरण मिले जिसमें सीईओ को गड़बड़ी नजर आई तो उन्होंने काम ही निरस्त कर दिए। जिला परिषद के कर्मचारियों के अनुसार वे दौरे पर निकलती जब लेपटॉप साथ में रहता और जीओ टेगिंग के साथ निरीक्षण करती। जहां भी भ्रष्टाचार या गड़बड़ी नजर आती, संबंधित को नोटिस, हिदायत देने के साथ ही काम को निरस्त कर देती। इतना ही नहीं अपने ग्रामीण क्षेत्र के दौरे के दौरान किसी को जानकारी तक नहीं देती।


चर्चा: विधायक व मंत्री चाहते थे सीईओ का तबादला


जानकारी के अनुसार जिले भर के जनप्रतिनिधि व ऑफिस स्टाफ के तबादले से खुश है। क्योंकि जहां उनके आने से भ्रष्टाचार रुक गया था वहीं ऑफिस में 5 मिनट की देरी भी बर्दाश्त नहीं करती थी। दूसरी तरफ चर्चा यह भी है कि जैसलमेर विधायक व केबिनेट मंत्री भी सीईओ तबादला करवाने के लिए पिछले कुछ समय से प्रयासरत थे।


मनरेगा के तहत नाडियों की स्वीकृति नहीं दी


जैसलमेर में मनरेगा के तहत सर्वाधिक लेबर नाडी खुदाई में चलती है। हकीकत में खुदाई मशीनों से होती है और लेबर के नाम पर फर्जी भुगतान उठता है। एक नाडी खुदई का काम भी 10 से 15 लाख रुपए तक का होता है। सीईओ को इसकी भनक लगी तो उन्होंने सबसे पहले नाड़ी के जितने भी काम नए स्वीकृत के लिए आए थे उन्हें रोक दिया। वहीं दूसरी तरफ चारागाह विकास, अमृत सरोवर सहित केन्द्र सरकार को ओर से जिन कार्यों पर जोर दिया जा रहा था, केवल उन्हें ही सेंक्शन दी।

Credit - Dinesh Gurjar