जीवन की हर परिस्थिति में प्रसन्न कैसे रहे- डॉ मधु बिश्नोई

जालौर /डॉ. मधु बिश्नोई

आज के समय में हर इंसान परेशान है कि मेरे जीवन में इतने दुख क्यों हैं? बल्कि उसे यह लगता है कि संसार के सबसे ज्यादा दुख मेरे ही जीवन में है और वह खुशियों की तलाश करता है!

खुशी क्या है ? प्रसन्न, शांत,  आनंदित मन!

 जो व्यक्ति ये जान लेगा समय / वक्त कभी स्थिर नहीं रहता। आज दुख है तो कल सुख होगा, और सुख के बाद में कभी दुख भी आएगा। यह जीवन का हिस्सा है, वह व्यक्ति हर परिस्थिति में प्रसन्न रहेगा। 


प्रसंता धन, दौलत, गाड़ी, मकान आदि शानो - शौकत से नहीं आती है और ना ही इनकी कमी से दुख!

जिसके पास यह सभी वस्तुएं होती हैं वह भी दुखी हो सकता है और जिसके पास नहीं है वह भी कई लोग प्रसन्न रहते हैं अर्थात प्रसंता वस्तु या पैसों से नहीं होती हैं बल्कि मन से होती हैं मन को नियंत्रित करने से होती है। -डाॅ मधु बिश्नोई


इस बात को समझ लेना कि सुख दुख जीवन का हिस्सा है  it's a part of life, कुछ भी स्थिर नहीं है,  तब मन प्रसन्न रहने लगेगा।

अच्छे कर्म करने से किसी की सहायता / हेल्प करने से पशु- पक्षियों, पेड़- पौधों से प्रेम करने से और प्रकृति के पास, अपने साथ वक्त बिताने से, सकारात्मक विचार रखने से,  मन सदैव हर परिस्थिति में प्रसन्न रहेगा।

और जो व्यक्ति स्वयं प्रसन्न रहेगा वह आसपास के सभी लोगों को प्रसंता का अनुभव करवा सकता है।