तकनीकी कर्मियों ने शक्ति भवन पर आज लगातार दूसरे दिन जारी रखा विरोध-प्रदर्शन

नवीन कुमार नंदन| लखनऊ: 

 यूपी कीराजधानी लखनऊ में आज 09 नवंबर को भी समस्त ऊर्जा निगमों के अंतर्गत तैनात टैक्नीशियन (टी.जी.2) कर्मियों का प्रतिनिधित्व करने वाले एकमात्र कैडर संघ - राज्य विद्युत परिषद प्राविधिक कर्मचारी संघ उत्तर प्रदेश द्वारा शीर्ष ऊर्जा प्रबन्धन के तानाशाही रवैये व अन्यायपूर्ण नीति के विरोध में पूर्व प्रस्तावित 8 चरणों के प्रदेशव्यापी चरणबद्ध आंदोलन की नोटिस के अनुसार पांचवें चरण आंदोलन में समस्त ऊर्जा निगमों के मुख्यालय "शक्ति भवन" लखनऊ के समक्ष दो दिवसीय शांतिपूर्ण विशाल विरोध-प्रदर्शन कार्यक्रम को जारी रखते हुए लगातार दूसरे दिन भी शक्ति भवन का घेराव कर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया गया जिसमें कल दिनांक 08 नवंबर 2021 से ही लखनऊ मुख्यालय में डेरा डाले प्रदेश के सभी ऊर्जा निगमों के लगभग दस हज़ार की संख्या में टैक्नीशियन कर्मियों ने प्रतिभाग किया गया।

घ के केंद्रीय संरक्षक डी के मिश्र ने बातया कि पूर्व में संघ द्वारा जारी प्रदेशव्यापी चरणबद्ध आंदोलन प्रदेश के यशस्वी ऊर्जा मंत्री पं. श्रीकांत शर्मा के दखल एवं संवर्ग की समस्याओं के शीघ्र समाधान किये जाने सम्बन्धी आश्वासन उपरान्त ही वापिस लिया गया था परंतु ऊर्जा प्रबधन की हठधर्मिता व संवर्ग के प्रति घोर उदासीनता के परिणामस्वरूप तकनीकी कर्मचारियों मे अत्यंत रोष व्याप्त है जिससे विवष होकर संघ द्वारा पुनः प्रदेशव्यापी चरणबद्ध आंदोलन प्रारम्भ किया गया है। उन्होंने बताया कि ऊर्जा प्रबन्धन द्वारा लगातर अड़ियल रवैया अपनाते हुए संघ के ऊपर अंदोलन थोपा जा रहा है। वर्तमान में जारी प्रदेशव्यापी चरणबद्ध आंदोलन के पहले चार चरण संपन्न होने के बाद भी ऊर्जा प्रबन्धन द्वारा शांतिपूर्ण समाधान निकाले जाने की बजाय दिनांक 25 अक्टूबर 2021 को प्रबन्ध निदेशक उप्र पावर कारपोरेशन लि. की अध्यक्षता में ऊर्जा प्रबन्धन व संघ प्रतिनिधि मंडल के मध्य सम्पन्न द्विपक्षीय वार्ता में हुई चर्चा व बनी सहमतियों के विपरीत कार्यवृत्त जारी कर अनावश्यक रूप से टकराव की स्थिति उत्पन्न की जा रही है। संघ द्वारा संवर्ग हित मे उक्त कार्यवृत्त को अस्वीकार करते हुए पूर्व प्रस्तावित आंदोलन को जारी रखने का निर्णय लिया गया है।

       

 संघ के केंद्रीय अध्यक्ष बृजेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि संघ विगत एक वर्ष से प्रदेश के टैक्नीशियन कर्मियों की मूलभूत मांगों व समस्याओं के समाधान हेतु प्रयासरत है जिसके क्रम में मा. ऊर्जा मंत्री द्वारा हस्तक्षेप किये जाने के उपरांत पूर्व में जारी आंदोलन स्थगित किया गया था। जिसके बाद दो बार प्रबन्ध निदेशक उप्र पावर कारपोरेशन लि. की अध्यक्षता में ऊर्जा प्रबन्धन व संघ प्रतिनिधि मंडल के मध्य दिनांक 03.04.21 व 17.08.21 को द्विपक्षीय वार्ताओं में संवर्ग की समस्याओं/ मांगों के सम्बंध में आम सहमति भी बनी थी।  इसके अतिरिक्त शासन स्तर पर भी 29.07.2021, 12.08.2021, 05.09.2021, 20.10.2021 व 22.10.2021 को अपर मुख्य सचिव ऊर्जा, उत्तर प्रदेश शासन के साथ संघ प्रतिनिधियों की सम्पन्न वार्ताओं में भी उक्त मांगों/ समस्याओं के समाधान के सम्बंध में आम सहमति बनी है परंतु आज तक ऊर्जा प्रबन्धन द्वारा किसी भी समस्या के समाधान की दिशा में कोई परिणामी आदेश जारी नहीं किये जा सके हैं।

       संघ के केंद्रीय उपाध्यक्ष दीपक चक्रवर्ती ने बताया कि शीर्ष ऊर्जा प्रबन्धन द्वारा लगातार अपने तकनीकी कर्मियों की जायज मांगों/ समस्याओं यथा ग्रेड-पे विसंगति, आमेलन, बिना अतार्किक सेवा बाध्यता के प्रोन्नति, एक अग्रिम इंक्रीमेंट, पट्रोल भत्ता अनुमन्यता व उत्पादन निगम में प्रोन्नति कोटा पावर कारपोरेशन की अनुरूपता में बढाया जाना आदि के प्रति लगातार उदासीनता दिखाई जा रही है।  उनका कहना था कि प्रबन्धन का इस प्रकार का रवैया न तो कर्मचारी हित में है, न ही उद्योग हित में है और न ही प्रदेश हित में है। उन्होंने कहा कि आंदोलन के कारण आम उपभोक्ताओं को विद्युत आपूर्ति सुचारू रूप से होती रहे इसलिए आज शक्ति भवन लखनऊ पर हुए विरोध प्रदर्शन में विद्युत उपकेंद्रों की परिचालन व्यवस्था हेतु तैनात तकनीकी कर्मियों को इस पंचम चरण आंदोलन कार्यक्रम से मुक्त रखा गया है।

       संघ के केंद्रीय महासचिव मौ. वसीम ने बताया कि प्रदेश के तकनीकी कर्मचारी विद्युत उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने एवं प्रदेश सरकार की समस्त योजनाओं को आम उपभोक्ताओं तक क्रियान्वित किये जाने सम्बन्धी कार्य बगैर समुचित व आवश्यक संसाधनों के पूरी कर्तव्यनिष्ठा व ईमानदारी के साथ सम्पादित कर रहे हैं परंतु ऊर्जा प्रबन्धन की हठधर्मिता, अन्यायपूर्ण नीति व तकनीकी कर्मचारी-हितों के प्रति उसकी घोर उदासीनता के कारण लगातर टकराव व औद्योगिक अशांति की स्थिति उत्पन्न हो रही है। उन्होंने बताया कि संघ सदैव शांतिपूर्ण रूप से द्विपक्षीय वार्ता के माध्यम से संवर्ग की जायज मांगों/ समस्याओं का निवारण चाहता है परंतु प्रबंधन द्वारा पूर्व में जारी विभिन्न द्विपक्षीय वार्ताओं उपरांत उनके द्वारा कार्यवृतों का क्रियान्वयन किये जाने की बजाय साल भर से परीक्षण के नाम पर जान-बूझ कर खानापूर्ति करते हुए संघ के ऊपर आंदोलन थोपा जा रहा है। उन्होंने बताया कि यदि शीघ्र ही ऊर्जा प्रबन्धन द्वारा अपनी हठधर्मिता छोड़कर पूर्व में बनी सहमति के अनुसार परिणामी आदेश जारी नहीं किये जाते हैं तो आंदोलन के प्रस्तावित अग्रिम चरणों में आंदोलन को और तीव्र बनाने की रणनीति तैयार की जाएगी।