डोटासरा की विदाई या भविष्य के संकेत, राजस्थान की राजनीतिक में बढी हलचल

Jaipur-

शिक्षा मंत्री गोविंद डोटासरा की  मंत्री पद से संभावित विदाई इस तरह से होगी शायद किसी ने नहीं सोचा था जयपुर में राज्य सरकार द्वारा उत्कृष्ट शिक्षण के लिए सम्मानित शिक्षकों की मौजूदगी में मुख्यमंत्री द्वारा यह पूछ लेना कि क्या तबादलों में पैसों का लेनदेन होता है एक गंभीर सवाल था हालांकि डोटासरा पर कभी पैसों के लेनदेन का खुला आरोप नहीं लगा है लेकिन अपने रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने के आरोपों से न केवल उनकी बल्कि  राज्य सरकार की छवि भी काफी धूमिल हो रही थी भाजपा शासन में भी शिक्षा मंत्री के रूप में देवनानी और कालीचरण सराफ पर इससे भी ज्यादा गंभीर आरोप लगते रहे हैं लेकिन आज जिस तरीके से मुख्यमंत्री गहलोत ने एक ईमानदार और जिम्मेदार नेता होने का आभास दिया वह काफी चौंकाने वाला है इसके साथ ही यह संकेत भी काफी स्पष्ट रूप से मिल गए हैं कि अब जल्दी ही मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है यह भी लगभग तय है कि दोहरी जिम्मेदारी वाले नेता मंत्री पद से मुक्त हो सकते हैं ऐसा करना उचित भी होगा और इससे जनता में यह संदेश भी जाएगा कि सरकार में योग्य व्यक्तियों की कोई कमी नहीं है


अब मुख्यमंत्री गहलोत राजनैतिक रूप से काफी आरामदायक स्थिति में है सचिन पायलट की स्थिति बहुत कमजोर हो चुकी ह और जैसा कि हम पहले भी कह चुके हैं पायलट के पास राजस्थान में अब कोई बड़ी राजनैतिक संभावना नहीं बची है राजनीतिक प्रेक्षक इस बात को अच्छी तरह जानते हैं कि गहलोत दबाव में आकर कोई काम नहीं करते इसलिए अब मंत्रिमंडल विस्तार मैं जो कुछ भी होग उनकी इच्छा से होगा और इस इच्छा पर भी पार्टी आलाकमान की मुहर होगी अब जबकि चुनाव में 2 साल का वक्त बचा है मुख्यमंत्री के पास सरकारी ढांचे को चुस्त-दुरुस्त करने और अपने मंत्रियों से परफॉर्मेंस मांगने का पूरा समय और अवसर है रही बात डोटासरा की तो उन्होंने एक मंत्री के रूप में काम तो  अच्छे किए हैं लेकिन उनकी छवि नकारात्मक ज्यादा बन गई है हो सकता है वह प्रदेश अध्यक्ष के रूप में  ज्यादा अच्छी छाप छोड़ पाए